मोबाइल नेटवर्क की पांचवी जनरेशन को 5G कहा जाता है। जिस तरह 4G सर्विस के आने से इंटरनेट की दुनिया में एक क्रांति आई थी ठीक उसी तरह 5जी सर्विस भारत में प्रारंभ होने पर इंटरनेट की स्पीड 4G की तुलना में कई गुना अधिक होगी। पहले से बेहतर वीडियो स्ट्रीमिंग और बेव लोडिंग हो सकेगी। फोन की बैटरी की खपत भी कम होगी।
यह काम कैसे करेगा?
कई नई तकनीकें इस्तेमाल की जाएंगी लेकिन अभी तक 5जी के सभी प्रोटोकॉल तय नहीं किए गए हैं.
यह हाई फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करेगा, 3.5GHz से 26GHz या उससे भी ज्यादा पर. इस फ्रीक्वेंसी बैंड में वेव लेंथ छोटे होते हैं. लेकिन परेशानी यह है कि छोटे वेव लेंथ को आसानी से रोका जा सकता है.
ऐसे में हो सकता है कि इन मिलीमीटर तरंगों को प्रसारित करने के लिए कम ऊंचाई वाले टेलिफ़ोन टावर लगाने पड़े जो एक दूसरे के अधिक नज़दीक होंगे.
इसके लिए कई ट्रांसमीटर लगाने होंगे, जिस पर ख़र्च ज़्यादा आएगा और टेलिकॉम कंपनियां निवेश और फ़ायदे पर सोच कर ही इसे भारत में शुरू करेंगी.
कब तक 5G संभव?
लेकिन भारत में 5जी आने में शायद अभी देर लगे. टेलीकॉम विशेषज्ञ आशुतोष सिन्हा मानते हैं कि इस नई तकनीक के लिए ज़रूरी भारी निवेश करने से शायद भारतीय कंपनियां बचें.
वो कहते हैं, "भारतीय टेलीकॉम बाज़ार बेहद प्रतिस्पर्धी हो गया है. कंपनियां मुनाफ़ा नहीं कमा पा रही हैं. ऐसे में नई तकनीक में निवेश करना कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाएगा."
सिन्हा कहते हैं, "इसका एक पहलू ये भी है कि क्या ग्राहक अधिक पैसा चुकाने के लिए तैयार हो पाएंगे. भारतीय बाज़ार में इस समय ग्राहकों को 4जी डेटा बेहद सस्ते दामों पर मिल रहा है. ऐसे में वो 5 जी पर अधिक ख़र्च करेंगे या नहीं ये देखने की बात होगी."
क्या फोन बदलना होगा?
शायद, क्योंकि जब 4G आया था, तब फ़ोन बदलना पड़ा था. यह संभव है कि नए फ़ोन बिना सिम के चलें. कई कंपनियां नई तकनीक पर काम कर रही है.
गांवों तक इसकी पहुंच हो सकती है पर यह कितना फ़ायदेमंद होगी, यह कहना मुश्किल है क्योंकि ग़रीब आबादी इस तकनीक पर ज़्यादा ख़र्च नहीं कर पाएगी.
Technique star komal.

0 Comments